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संसद भवन के लिए नई इमारत बनाने की रेस में शामिल हुए बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो

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संसद भवन के लिए नई इमारत बनाने की रेस में शामिल हुए बहुराष्ट्रीय कंपनी लार्सन एंड टूब्रो
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नई दिल्ली (एजेन्सी)। संसद भवन के लिए नई इमारत बनाने की रेस में अब तीन कंपनियों का नाम फाइनल राउंड में पहुंच गया है।इसमें लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) भी शामिल है,इस अयोध्या में राम मंदिर बनाने का काम मिला है।केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक तीन कंस्ट्रक्शन कंपनियां संसद भवन की नई इमारत बनाने के लिए फाइनेंशियल बिड जमा करने के लिए पात्र मानी गई हैं।

इसमें लार्सन एंड टूब्रो, टाटा प्रोजेक्ट्स, शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी शामिल हैं।जानकारी के मुताबिक केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत संसद भवन की नई इमारत बनानी है। यह इमारत मौजूदा संसद भवन के पास ही प्लॉट नंबर 118 पर बनानी है।

यह इमारत बेसमेंट को मिलाकर दो मंजिल की होगी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के मुताबिक इस पर करीब 889 करोड़ रुपये की लागत आएगी और निर्माण कार्य 21 महीने में पूरा होगा। प्री-क्वालिफिकेशन के दौर में सात कंपनियों को शामिल किया गया था, लेकिन इनमें से सिर्फ तीन कंपनियां ही फाइनल बिडिंग राउंड के लिए चुनी गईं।

तीनों फाइनल कंपनियों में से एक एलएंडटी को राम मंदिर बनाने का भी जिम्मा मिला है।लार्सन एंड टूब्रो को राम मंदिर ​निर्माण का काम मिलने के पीछे की बड़ी वजह यह है, कि जिस वक्त मंदिर निर्माण की बात 90 के दशक में चल रही थी, तब अशोक सिंघल ने कंपनी से संपर्क साधा था।

कानूनी विवादों की वजह से कोई बात आगे नहीं बढ़ी थी, लेकिन अब जब तमाम बाधाएं दूर हो चुकी हैं, अब कंपनी खुद ही बातचीत के आधार पर मंदिर बनाने के लिए आगे आई है।लार्सन एंड टूब्रो एक ऐसी बहुराष्ट्रीय कंपनी है जो भारत की है और इसका केंद्र भारत में है। यह टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन की एक दिग्गज कंपनी है।

यह दुनिया के 30 देशों में हाईड्रोकार्बन, इन्फ्रास्ट्रक्चर,पावर, प्रो​सेस इंडस्ट्रीज और डिफेंस के क्षेत्र में ग्राहक कंपनियों के लिए काम करती है। मुंबई मुख्यालय वाली कंपनी की स्थापना डेनमार्क के दो इंजीनियरों हेनिंग हॉल्क लार्सन और सॉरेन क्रिस्टियन टूब्रो ने 1938 में की थी। अब इसका स्वामित्व भारतीय हाथों में है। अनिल मणिभाई यानी ए.एम नाइक इसके चेयरपर्सन हैं।

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