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लाजपोर जेल में 14 मोबाइल का खेल, विजिलेंस छापे से खुली पोल

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बाथरूम, वॉश बेसिन और कैदी की जेब से मिले मोबाइल-सिम कार्ड

जेल से गैंग ऑपरेशन के आरोपों के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

सूरत की सचिन स्थित लाजपोर मध्यस्थ जेल एक बार फिर कुख्यात गतिविधियों और गंभीर लापरवाही को लेकर चर्चा के केंद्र में आ गई है। जेल की चारदीवारी के पीछे बैठकर कुख्यात आरोपियों द्वारा हत्या और फिरौती की सुपारी दिए जाने तथा अंदर से ही गैंगवार संचालित किए जाने के गंभीर आरोपों के बीच जेल से करीब 14 मोबाइल फोन बरामद होने से पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। एक ओर जेल प्रशासन ऐसे खतरनाक कैदियों को सुरक्षा कारणों से दूसरी जेल में स्थानांतरित करने के लिए कोर्ट का रुख कर रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद जेल के भीतर से खुलेआम प्रतिबंधित मोबाइल और सिम कार्ड बरामद होने से सुरक्षा व्यवस्था की पोल खुल गई है।

लाजपोर जेल में विजिलेंस का सरप्राइज चेक, सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में

गांधीनगर स्थित पुलिस महानिदेशक (जेल एवं सुधारात्मक प्रशासन) के मौखिक आदेश के बाद विजिलेंस तलाशी दस्ते ने देर रात जेल परिसर में अचानक छापा मारा। अहमदाबाद से पहुंची टीम के जेलर देवशीभाई करंगिया और उनकी टीम ने विभिन्न बैरकों की गहन तलाशी शुरू की।

विजिलेंस टीम के जेल के अंदर पहुंचते ही स्थानीय जेल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई और उन्होंने भी तत्काल चेकिंग शुरू कर दी। इसी दौरान स्थानीय स्टाफ को भी अंदर से 3 मोबाइल फोन मिले होने की जानकारी सामने आई है। डीजी विजिलेंस की इस कार्रवाई में स्थानीय जेल अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जेल में कैदी, बाहर गैंग? लाजपोर की सुरक्षा पर फिर गंभीर सवाल

सूरत में पहले हुए चर्चित सतीश मराठा हत्याकांड से लेकर भाजपा के युवा नेता जय दलाल की हत्या तक, कई हाई-प्रोफाइल अपराधों के तार सचिन सब-जेल से जुड़े होने की बात सामने आई थी। आरोप है कि जेल में बंद कुछ दबंग और कुख्यात तत्व जेल के अंदर से ही अपने साथियों से संपर्क कर बाहरी आपराधिक नेटवर्क संचालित करते रहे हैं। जेल से ही सुपारी किलिंग और गैंगवार को अंजाम देने के लिए नेटवर्क चलाए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं। इतनी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद जेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था में मौजूद इन खामियों को गंभीरता से नहीं लिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि जेल के अंदर प्रतिबंधित संचार उपकरण आसानी से पहुंचते रहे।

बाथरूम से जेब तक: लाजपोर जेल में छिपे मिले मोबाइल

विजिलेंस की तलाशी के दौरान जेल के अंदर छिपाकर रखे गए मोबाइल फोन जिस तरह बरामद हुए, वह चौंकाने वाला है। यार्ड नंबर सी-8 की बैरक-1 के बाथरूम में बाल्टी के नीचे प्लास्टिक की थैली में लपेटकर रखे गए नोकिया और केचोडा कंपनी के मोबाइल फोन मिले। वहीं वॉश बेसिन के बाहर चार्जिंग पर लगाए गए मोबाइल भी जब्त किए गए। इसके अलावा बैरक में बंद विचाराधीन आरोपी रमाकांत उर्फ भोला गहजे रईदास की व्यक्तिगत तलाशी लेने पर उसकी पहनी हुई पैंट की दाहिनी जेब से मोटोरोला कंपनी का मोबाइल फोन चालू हालत में बरामद हुआ। इसके अलावा यार्ड सी-3 और सी-11 की बैरकों से शौचालय के दरवाजे के पीछे तथा प्लास्टिक के डिब्बे के नीचे छिपाकर रखे गए मोबाइल फोन भी जब्त किए गए।

बाजार में हजारों, पंचनामे में ₹100—मोबाइल की कीमत पर सवाल

पूरी कार्रवाई के बाद दर्ज पुलिस शिकायत में सबसे हैरान करने वाली बात सामने आई है। मोटोरोला जैसे मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड वाले प्रतिबंधित मोबाइल जब्त किए जाने के बावजूद सरकारी पंचनामा और रिकॉर्ड में इन मोबाइल फोन की कीमत प्रति नग मात्र 100 रुपये दर्शाई गई है।

यानी 11 मोबाइल फोन की कुल कीमत महज 1,100 रुपये दर्ज की गई।

बाजार में हजारों रुपये कीमत वाले मोबाइल को रिकॉर्ड में केवल 100 रुपये का फोन दर्शाए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। अधिकांश मोबाइल फोन में VI और BSNL कंपनी के एक्टिव सिम कार्ड मिले हैं। वहीं कुछ मोबाइल पासवर्ड लॉक होने के कारण उनकी जानकारी तत्काल सामने नहीं आ सकी।

मोबाइल बरामदगी के बाद बढ़ा शक, जेल स्टाफ की भूमिका की जांच

हाई-सिक्योरिटी जोन मानी जाने वाली जेल के अंदर इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल फोन पहुंचने के मामले में जेल विभाग के ही किसी कर्मचारी या अधिकारी की मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है। इन मोबाइल फोन के जरिए किन-किन कैदियों ने बाहर सुपारी दी, आपराधिक साजिश रची या अपने गिरोह के सदस्यों से संपर्क किया, इसकी जानकारी जुटाने के लिए सभी 11 मोबाइल फोन को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने की कार्रवाई की जा रही है। पूरे मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS)-2023 की धारा 223 तथा प्रिजन एक्ट की धारा 42, 43 और 45 की उपधारा 12 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जांच शुरू कर दी गई है।

जैमर फेल या सुरक्षा में सेंध? लाजपोर जेल में मोबाइल बरामद

सूरत की इस जेल को अत्याधुनिक हाईटेक जेल के रूप में प्रचारित किया जाता है। तंत्र की ओर से बार-बार दावा किया जाता रहा है कि जेल के अंदर हाई-फ्रीक्वेंसी जैमर लगे हैं, जिसके कारण कोई मोबाइल नेटवर्क काम नहीं करता। लेकिन जेल के अंदर से लगातार मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड बरामद होने की घटनाएं इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं। इस कार्रवाई से यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर जैमर लगे होने के बावजूद जेल के अंदर मोबाइल फोन किस तरह सक्रिय थे? यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी इसी जेल से कई बार मोबाइल फोन, गांजा और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद हो चुकी हैं।

जैमर के बीच मोबाइल का खेल: लाजपोर जेल की हाईटेक सुरक्षा पर बड़ा सवाल

लाजपोर जेल को हाईटेक सुरक्षा और कड़ी निगरानी वाली जेल बताया जाता है। मोबाइल नेटवर्क रोकने के लिए जैमर सिस्टम होने के दावे भी किए जाते हैं। लेकिन विजिलेंस की अचानक कार्रवाई में जेल के भीतर से बड़ी संख्या में मोबाइल फोन और एक्टिव सिम कार्ड मिलने के बाद अब सवाल सिर्फ मोबाइल मिलने तक सीमित नहीं है—आखिर ये फोन जेल के अंदर पहुंचे कैसे और इनका इस्तेमाल कौन कर रहा था?

बाथरूम, शौचालय, वॉश बेसिन और यहां तक कि एक कैदी की पैंट की जेब से मोबाइल बरामद होने ने सुरक्षा व्यवस्था की कई परतों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रतिबंधित मोबाइल जेल के भीतर पहुंच रहे थे, तो प्रवेश के दौरान होने वाली तलाशी और नियमित चेकिंग कितनी प्रभावी थी?

जैमर के बावजूद एक्टिव सिम ने बढ़ाई जांच की दिशा

जांच का अहम बिंदु यह भी है कि बरामद मोबाइल में VI और BSNL के एक्टिव सिम कार्ड मिले हैं। ऐसे में अब FSL और तकनीकी जांच से यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इन मोबाइल का इस्तेमाल कब-कब हुआ, किन नंबरों पर संपर्क किया गया और क्या इनका इस्तेमाल जेल के बाहर मौजूद किसी आपराधिक नेटवर्क से संपर्क के लिए किया जा रहा था।

मोबाइल सिर्फ फोन नहीं, पूरे नेटवर्क की कड़ी?

यदि FSL जांच में मोबाइल से आपराधिक संपर्क या संदिग्ध गतिविधियों के प्रमाण मिलते हैं, तो जांच का दायरा जेल के भीतर मोबाइल रखने वाले कैदियों से आगे बढ़ सकता है। यह भी जांच का विषय होगा कि मोबाइल जेल के अंदर किस माध्यम से पहुंचे, किसने पहुंचाए और क्या किसी अंदरूनी व्यक्ति की मदद ली गई थी।

विजिलेंस की कार्रवाई ने फिलहाल एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—हाईटेक सुरक्षा, जैमर और कड़ी निगरानी के दावों के बावजूद लाजपोर जेल के अंदर मोबाइल का यह नेटवर्क आखिर चल कैसे रहा था?

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