हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद 15 दिन में 200 से ज्यादा मामलों की चार्जशीट तैयार

वकालत की आड़ में आपराधिक गतिविधियों पर शिकंजा
वकालत की आड़ में कथित तौर पर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों का सामना कर रहे वकीलों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद गठित विशेष प्रकोष्ठ ने ऐसे मामलों की जांच में तेजी लाते हुए महज 15 दिनों में 200 से अधिक मामलों में चार्जशीट तैयार कर न्यायालय में भेज दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट समेत उत्तर प्रदेश की जिला अदालतों में फर्जी लॉ डिग्री और दस्तावेजों के आधार पर वकालत करने का बड़ा मामला सामने आया है। हाईकोर्ट के सख्त आदेश के बाद फर्जी डिग्री के जरिए बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ पूरे प्रदेश में कार्रवाई तेज कर दी गई है।
बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव आरके शुक्ला के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक 100 ऐसे अधिवक्ताओं को चिन्हित किया गया है, जिनकी लॉ डिग्रियां बार काउंसिल ऑफ इंडिया के Certificate and Place of Practice Verification Rules-2015 के तहत किए गए सत्यापन में फर्जी पाई गई हैं।
इन सभी चिन्हित अधिवक्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कार्रवाई के दायरे में वे अधिवक्ता हैं, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के आधार पर बार काउंसिल में पंजीकरण हासिल किया और उसके बाद अदालतों में वकालत की।
पुलिस की कार्रवाई से ऐसे वकीलों और लीगल एसोसिएट्स में हड़कंप मचा हुआ है, जिन पर कानून की पेशेवर पहचान का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल कर आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
200 से ज्यादा मामलों में चार्जशीट
विशेष प्रकोष्ठ द्वारा की गई कार्रवाई में 200 से अधिक मामलों की जांच पूरी करते हुए चार्जशीट तैयार की गई है। संबंधित दस्तावेज न्यायालय में भेजे जा चुके हैं। अधिकारियों का कहना है कि लंबित मामलों में भी जांच और कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जा रहा है।
100 से ज्यादा मामलों में चार्जशीट बाकी
वहीं, 100 से अधिक मामलों में अभी चार्जशीट दाखिल किया जाना बाकी है। इन मामलों में पुलिस जांच पूरी करने के बाद साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।
हाईकोर्ट के रुख के बाद बनी विशेष व्यवस्था
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट की सख्ती के बाद मामलों की निगरानी और कार्रवाई के लिए विशेष प्रकोष्ठ का गठन किया गया। इसके बाद पुलिस ने लंबित मामलों की समीक्षा शुरू की और प्राथमिकता के आधार पर जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया तेज कर दी।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई जांच
फर्जी लॉ डिग्री के मामलों को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सत्यापन और कार्रवाई के निर्देश दिए थे। इसके बाद बार काउंसिल स्तर पर अधिवक्ताओं की डिग्रियों और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन तेज किया गया।जांच के दौरान जिन डिग्रियों को निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया में फर्जी पाया गया, उनके आधार पर पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं की सूची तैयार की गई है। अब इनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
वकालत की प्रतिष्ठा पर बड़ा सवाल
फर्जी डिग्री के आधार पर कानून की प्रैक्टिस करने का मामला सामने आने से न्यायिक व्यवस्था और वकालत जैसे प्रतिष्ठित पेशे की विश्वसनीयता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू करना है, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण हासिल किया।












