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पुलिस थानों में CCTV लगाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र ने दो हफ्ते में समाधान का दिया भरोसा

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केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि देशभर के पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने से संबंधित सभी मुद्दों को दो सप्ताह के भीतर सुलझा लिया जाएगा। अटॉर्नी जनरल आर वेंकटारमानी ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को बताया कि वह इस पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं और कई स्तरों पर काम जारी है।

नई दिल्ली: देशभर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों के इंस्टॉलेशन और उनके सुचारु संचालन को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि इस संबंध में लंबित सभी समस्याओं का समाधान अगले दो हफ्तों में कर लिया जाएगा। मंगलवार को सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने शीर्ष अदालत को बताया कि वह खुद इस पूरे मामले की समीक्षा कर रहे हैं और कई स्तरों पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता ने इससे पहले 6 अप्रैल को केंद्र सरकार के गृह सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया था, ताकि पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने की योजना के क्रियान्वयन पर उनसे आवश्यक सहायता ली जा सके। आदेश के अनुपालन में गृह सचिव मंगलवार को अदालत में मौजूद थे।


दो सप्ताह के भीतर सभी मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगले दो सप्ताह के भीतर नियमित बैठकों के जरिए सभी लंबित मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में न्यायालय द्वारा नियुक्त एमिकस क्यूरी और संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो और व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू हो सके। यह मामला पुलिस थानों में कार्यशील सीसीटीवी कैमरों की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान के तहत सुना जा रहा है।
अदालत ने पहले भी चेताया था
अदालत पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि पारदर्शिता, जवाबदेही और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी हैं। हिरासत में होने वाली घटनाओं, पूछताछ की प्रक्रिया और पुलिस कार्रवाई की निगरानी के लिए यह व्यवस्था अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल के लिए तय कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट 2018 से इस मुद्दे की निगरानी कर रहा है, जब उसने पारदर्शिता सुनिश्चित करने और हिरासत में प्रताड़ना को रोकने के लिए पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का पहला आदेश दिया था। दिसंबर 2020 में, अदालत ने इस आदेश का विस्तार करते हुए इसमें सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालयों को भी शामिल किया था।

इन निर्देशों के तहत, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वारों, लॉक-अप, गलियारों, लॉबी और रिसेप्शन क्षेत्रों में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य है। सिस्टम में नाइट विजन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग क्षमता और कम से कम एक वर्ष तक डेटा भंडारण की क्षमता होनी चाहिए।

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