सूरत। लाजपोर सेंट्रल जेल में हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा भुगतने वाले एक कैदी की आत्महत्या का मामला सामने आया है। अदालत से उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के ठीक एक दिन बाद कैदी ने जेल के बाथरूम की खिड़की से फंदा लगाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद जेल प्रशासन में हलचल मच गई।
मृतक की पहचान शंभूलाल आड़ा के रूप में हुई
मृतक की पहचान 37 वर्षीय शंभूलाल कमलानाथ आड़ा के रूप में हुई है। वह मूल रूप से राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के भोपोत गांव का रहने वाला था। वह वर्ष 2024 से हत्या के मामले में लाजपोर जेल में बंद था। जानकारी के अनुसार, शंभूलाल को 2 नवंबर 2026 को सूरत की 11वीं एडिशनल सेशंस कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
प्रेम संबंध में शक के चलते महिला की हत्या का मामला
पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शंभूलाल का राधाबेन नामक महिला के साथ करीब आठ वर्षों से प्रेम संबंध था। उसे शक था कि महिला के किसी अन्य व्यक्ति के साथ संबंध हैं। इसी विवाद के चलते 19 फरवरी 2024 को कतारगाम की ललिता चौकड़ी के पास संतकृपा पैलेस बिल्डिंग में उसने कथित तौर पर महिला और उसके बिस्तर पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी। इस घटना में गंभीर रूप से झुलसी राधाबेन की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। महिला की बेटी की शिकायत के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर शंभूलाल को गिरफ्तार किया था।
कॉमन टॉयलेट में मिला शव, सचिन पुलिस ने शुरू की जांच
रिपोर्ट के अनुसार, 3 नवंबर को शंभूलाल जेल के यार्ड नंबर C/2/1 स्थित कॉमन टॉयलेट में गया था। काफी देर तक बाहर नहीं आने पर जेल कर्मचारियों ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा खोलने पर वह वेंटिलेशन ग्रिल से कपड़े की रस्सी के सहारे लटका मिला। उसे जेल के मेडिकल सेंटर ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर सचिन पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की। मामले में कस्टोडियल डेथ की जांच भी शुरू की गई है।
10 दिनों के भीतर जेल में दूसरी ऐसी घटना
गौरतलब है कि लाजपोर सेंट्रल जेल में 10 दिनों से भी कम समय के भीतर कैदी की फांसी से मौत की यह दूसरी घटना बताई जा रही है। इससे पहले 26 अक्टूबर को एक अन्य विचाराधीन कैदी मनीष कुर्मी भी जेल में मृत मिला था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद जेल में कैदियों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना के समय निगरानी और सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।










