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4 दिन में जुर्माने से 1 करोड़ 71 लाख की वसूली

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मोटर व्हीकल एक्ट में सरकार ने जुर्माने की राशि में जो संशोधन किया है। पिछले 4 दिनों में 1 करोड़ 71 लाख रुपया जर्माने में वसूल किए है। यह जुर्माना हरियाणा राज्य में 52.32 लाख, 343 चालानों के माध्यम से वसूला गया है। उड़ीसा में 88.90 लाख रुपया 4080 चालान काटे गये। कर्नाटक के बैंगलूर में ट्राफिक पुलिस ने 30 लाख रुपया पिछले 4 दिनों में वसूल किये हैं। दिल्ली राज्य में भी 1 दिन में ट्रैफिक पुलिस ने 3900 चालान काटे हैं। इसमें कितना जुर्माना वसूला गया है। इसके आंकड़े अभी सामने नहीं आये हैं। दिल्ली राज्य के जुर्माने को जोड़ दिया जाये, तो यह राशि 4 करोड़ रुपया से ऊपर पहुंच जाएगी। मोटर व्हीकल एक्ट में नए जुर्माने का जो प्रावधान किया है, वह कुछ ही शहरों में लागू हुआ है। जब यह देश भर में कार्यवाही होगी, तो सरकार प्रतिदिन अरबों रुपयों की राशि जुर्माने के रूप में वसूल करेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी का कहना है कि सड़क हादसों में प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख लोगों की मौत दुर्घटनाएं में हो रही है। इससे ज्यादा आत्महत्या, किसान, युवा बेरोजगार एवं छात्र-छात्राएं भारत में हो रही हैं। यदि तीनों की आत्महत्या का आंकड़ा जोड़ दिया जाये, तो प्रतिवर्ष भारत में लगभग 3 लाख 50हजार से ज्यादा मौतें आत्महत्या के कारण हो रही हैं। इन्हें रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने क्या उपाय किये, आत्महत्या किन कारणों से हो रही है। जो उसके लिए जिम्मेदार हैं उन पर जुर्माना और उनके प्रति कार्यवाही को लेकर सरकार क्यों मौन है? इसको लेकर आम आदमी का गुस्सा शासन, प्रशासन और व्यवस्थाओ पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। सारी दुनिया के देशों में सबसे ज्यादा आत्महत्या भारत में हो रही है।मोटर व्हीकल एक्ट में वाहन चालकों के ऊपर विभिन्म मामलों में 10 हजार रुपया तक का जुर्माना वसूल करने का प्रावधान किया गया है। एक बार में पुलिस किसी भी वाहन चालक पर अधिकतम 52500 रुपये का जुर्माना वसूल कर सकती है। इस दायरे में दुपहिया वाहन से लेकर बड़े वाहनों के चालकों को रखा गया है। भारत की पुलिस लहरें गिनने का पैसा वसूल करती है। जिस देश में रिपोर्ट लिखवाने के लिए पुलिस रिश्वत लेती है, वहां पर पुलिस के हाथों में जुर्माने के इस झुनझुने को पकड़ाने से आम आदमी की क्या दुर्दशा होगी, यह आसानी से समझा जा सकता है। भारत जैसे देश में जहां 90 फीसदी परिवारों की आय 10 हजार से 15 हजार रुपया मासिक है। उनसे यह जुर्माना किस तरह वसूल किया जा सकता है। यदि उन्होने जुर्माना नहीं दिया, तो वाहन जब्त होगा। उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। जुर्माना यदि चुका दिया तो वह परिवार की पूरे माह गुजर वसर किस तरह करेगा। सरकार ने इसका कोई विकल्प नहीं सुझाया है। जिन सड़क दुर्घनाओं का हवाला दिया जा रहा है। उनमें 60 फीसदी से ज्यादा मौतें खराब सड़कों, वाहन निर्माता कंपनियों की लापरवाही तथा सड़क पर काम चलने के दौरान ठेकेदारों एवं सरकारी एजेंसियों द्वारा सूचनै फलक एवं दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जो कार्य करना था, वह नहीं किये जाने के कारण दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। आपातकाल के दौरान जिस तरह संजय गांधी ने नसबंदी कार्यक्रम के लक्ष्य देकर आम जनता के बीच भय का वातावरण बनवाकर जनसंख्या नियंत्रण की कोशिश की थी। ठीक उसी तरह अघोषित अपातकाल में वाहन चालकों के मन में पुलिस का भय वर्तमान सरकार बनाने का काम कर रही है। कहा जाता है कि वाहन की जांच के समय पुलिस कोई न कोई कमी बताकर जुर्माना वसूल सकती है। पहले भी पुलिस और आरटीओ द्वारा जबरिया वसूली की जा रही है। ऐसा हमारा मोटर व्हीकल एक्ट है। जब पुलिस के हाथ में सरकार ने वसूली का इतना बड़ा हथियार थमा दिया हो तो वाहन चालकों की क्या हालत होगी। आसानी से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पुलिस के चालान से बचने के लिए जो वाहन भगाने के लिए तेजी से वाहन चलाने का प्रयास करेगे, उससे दुर्घटनाएं और बढ़ने की संभावना है। सरकार ने जुर्माने की राशि लागू करने के पूर्व संवेदनशीलता का जो परिचय देना चाहिए था। वह नहीं दिया गया है। जिसके कारण जनरोष बढ़ना तय है।

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