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प्रेंग्नेंसी में प्लेसेंटा को नुकसान पहुंचा सकता है कोरोना -गर्भवती महिलाओं की बेहतर मॉनिटरिंग समय की जरूरत

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लंदन (एजेंसी)। हालांकि, अब तक के आंकड़ों से पता चलता है कि गर्भवती महिलाओं में कोरोना संक्रमण की दर कम है, लेकिन ऐसे शोध सामने आए हैं जिनमें गर्भवती महिलाओं पर कोविड-19 के असर की बात की गई। अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन अध्ययन का कहना है कि इस बीमारी से प्लेसेंटा को चोट लग सकती है। इसका गंभीर परिणाम हो सकता है। इस अध्ययन के निष्कर्ष अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल पैथोलॉजी में प्रकाशित हुए हैं। इसके के मुताबिक, प्लेसेंटा एक ऐसा अंग है जो गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय की परत के अंदर बढ़ता है। यह अम्बिलिकल कॉर्ड यानी गर्भनाल से जुड़ा हुआ होता है और गर्भ में पल रहे बच्चे को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आपूर्ति करता है। यह बच्चे को अपशिष्ट से भी दूर रखता है। शोधकर्ताओं ने उन 16 महिलाओं के प्लेसेंटा में घाव देखे, जो गर्भावस्था के समय कोरोना वायरस पॉजिटिव पाई गई थीं। प्लेसेंटा में नजर आए ये घाव मां और बच्चे के बीच रक्त के असामान्य बहाव में देखा गया। यह निष्कर्ष यह समझने में मदद करेगा कि महामारी के दौरान गर्भवती महिलाओं को किस तरह मॉनिटर किया जाना चाहिए।
शोधकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं के प्लेसेंटा में दो साधारण रूप से असामान्य स्थितियों को देखा। एक तो प्रवाह असामान्य रक्त वाहिकाओं के साथ मां से भ्रूण में अपर्याप्त रक्त प्रवाह, जिसे एमवीएम यानी मेटरनल वेस्क्यूलर मालपरफ्यूजन कहते हैं और दूसरा प्लेसेंटा में रक्त के थक्के, जिसे इंटरवेलियस थ्रोम्बी कहा जाता है। एमवीएम के सामान्य मामलों में, मां का रक्तचाप सामान्य से अधिक होता है। यह स्थिति आमतौर पर प्रीक्लेम्पसिया या हाई ब्लड प्रेशर वाली महिलाओं में देखी जाती है। इस अध्ययन में 15 रोगियों में से केवल एक को प्रीक्लेम्पसिया या हाईपरटेंशन था। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी फिनबर्ग स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं के अनुसार इनमें से अधिकांश शिशुओं को सामान्य गर्भधारण के बाद पूर्ण अवधि में प्रसव कराया गया था, इसलिए प्लेसेंटा के साथ कुछ भी गलत होने की उम्मीद नहीं होगी, लेकिन यह वायरस कुछ चोटों की वजह बनता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि निष्कर्ष महत्वपूर्ण हैं। वे सहमत हैं कि गर्भवती महिलाओं की बेहतर मॉनिटरिंग समय की जरूरत है।

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