सूरत: शहर में डिमोलिशन कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ वेड दरवाजा क्षेत्र स्थित नासीरनगर में करीब 100 से अधिक मकानों पर डिमोलिशन की कार्रवाई की गई, वहीं दूसरी ओर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सचिन क्षेत्र के जमशेदनगर में सरकारी जमीन पर लगभग 30 से अधिक टीन शेड (पतरों के कमरे) बनाकर किराए पर दिए जाने के आरोप सामने आ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जमशेदनगर मामले में केवल जांच चलने की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं?वहीं नासीरनगर डिमोलिशन को लेकर भी कई सवाल अभी तक अनुत्तरित हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह कार्रवाई आखिर किसके द्वारा की गई थी — महानगरपालिका द्वारा या किसी अन्य एजेंसी अथवा बिल्डर द्वारा? इस संबंध में अब तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
इस पूरे मामले को लेकर नागरिकों का कहना है कि यदि अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, तो वह पूरे शहर में समान रूप से होनी चाहिए। एक ही शहर, एक ही प्रशासन… फिर कार्रवाई में अंतर क्यों? यह सवाल अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
नोट: जमशेदनगर और नासीरनगर से जुड़ी जानकारी एवं आरोप स्थानीय सूत्रों और चर्चाओं पर आधारित हैं। संबंधित सरकारी विभागों की ओर से आधिकारिक पुष्टि या स्पष्टीकरण आना अभी बाकी है।



