एम. नागराजन को ‘समग्र शिक्षा अभियान’ का स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाया, कलेक्टर तेजस परमार को अतिरिक्त प्रभार
सूरत के चर्चित और विवादित नासीरनगर डिमोलिशन मामले में गुजरात हाईकोर्ट की कड़ी फटकार के बाद राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने 11 अगस्त 2026 को तत्काल प्रभाव से सूरत नगर निगम कमिश्नर एम. नागराजन का तबादला कर दिया है।नासीरनगर में बिना किसी पूर्व नोटिस के डिमोलिशन की कार्रवाई को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को लेकर सख्त रुख अपनाया था।
20 जुलाई को हाईकोर्ट ने लगाई थी कड़ी फटकार
20 जुलाई को हाईकोर्ट में राज्य सरकार और सूरत नगर निगम कमिश्नर को कड़े शब्दों में फटकार लगाते हुए सवाल किया गया था कि यदि अवैध डिमोलिशन मामले में छोटे कर्मचारियों को निलंबित किया गया है, तो नगर निगम कमिश्नर अपने पद पर कैसे बने रह सकते हैं?

हाईकोर्ट केइस सवाल के 22 दिन बाद सूरत नगर निगम कमिश्नर का तबादला कर दिया गया है।
‘समग्र शिक्षा अभियान’ के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनाए गए
राज्य सरकार के नोटिफिकेशन के मुताबिक एम. नागराजन को गांधीनगर में ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं, उनकी जगह सूरत के मौजूदा जिला कलेक्टर तेजस दिलीपभाई परमार को सूरत नगर निगम कमिश्नर का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा, ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के पूर्व स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर रंजीथ कुमार जे. को गुजरात इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (GERC), गांधीनगर के सचिव पद पर नियुक्त किया गया है।
SOG DCP के खिलाफ सरकार का अगला रुख क्या होगा?
नासीरनगर अवैध डिमोलिशन मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने केवल सूरत नगर निगम कमिश्नर की कार्यप्रणाली पर ही सवाल नहीं उठाए थे, बल्कि SOG DCP राजदीपसिंह नकुम की भूमिका और कार्यप्रणाली को लेकर भी गंभीर सवाल किए थे।
अब हाईकोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार द्वारा नगर निगम कमिश्नर का तबादला किए जाने के बाद सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि SOG DCP के मामले में सरकार का अगला रुख क्या रहता है। इस मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार हाईकोर्ट के समक्ष क्या जवाब और दलीलें रखती है, इस पर भी सभी की नजरें हैं। खास तौर पर 14 अगस्त को नासीरनगर डिमोलिशन मामले में हाईकोर्ट में होने वाली अगली महत्वपूर्ण सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सुनवाई से केवल तीन दिन पहले नगर निगम कमिश्नर का तबादला किया गया है।
क्या है ‘भूतिया डिमोलिशन’ विवाद?
सूरत में 29 और 30 मई 2026 को वेड दरवाजा के पास स्थित नासीरनगर में भारी पुलिस बंदोबस्त के बीच करीब 100 मकानों का डिमोलिशन किया गया था।
हालांकि, इस कार्रवाई को गुजरात के इतिहास के सबसे रहस्यमय डिमोलिशन में से एक बताया जा रहा है। इस कार्रवाई के पीछे असली जिम्मेदार कौन है, इसका चेहरा अभी तक सामने नहीं आया है।इसके बाद मामला गुजरात हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने नगर निगम कमिश्नर से लेकर पुलिस कमिश्नर और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली तक पर गंभीर सवाल उठाए थे।
अब नगर निगम कमिश्नर के तबादले के बाद यह मामला और भी चर्चा में आ गया है और 14 अगस्त की सुनवाई में हाईकोर्ट का रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।












